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खराब अंपायरिंग के कारण क्रिकेट को कितना नुकसान हुआ जानिए

साल 2006 के अंत में, एक वर्ल्डकप विजेता श्रीलंकाई क्रिकेटर ने सन्यास लेने के बाद अंपायर बनने का फैसला किया क्योंकि “उन्हें अपने प्रिय खेल के नज़दीक रहने की इच्छा थी”।

2009 में उन्होंने पहले अंतरराष्ट्रीय मैच में अंपायरिंग की । साल 2011 के विश्व कप में अंपायरिंग की तथा आईसीसी “एलीट अंपायर” पैनल में नियुक्त हुए। 2012 में “अंपायर ऑफ द ईयर” आईसीसी पुरस्कार भी जीता। तब से उन्होंने कई आईसीसी प्रतियोगिताओं में अंपायरिंग की तथा काफी प्रशंसा हासिल की है।
जिस अंपायर की हम बात कर रहे हैं, वो हैं श्री लंका के कुमार धर्मसेना।
यह ध्यान में रखते हुए कि धर्मसेना अंपायरिंग को कितना लाइक करते हैं और कितने माहिर हैं, हमें इस बात से बहुत ताजुब होता है की उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट में कितने गलत फैसले लिए हैं। हाल ही में हो रहे अंपायरिंग के बवाल का वो हिस्सा हैं तथा यह दर्शाता है की कैसे खराब अंपायरिंग खेल पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। नीचे दिए गए 2 फैसले बताते हैं की काफी अच्छे अंपायर होने के बावजूद कैसे धर्मसेना ने बहुत ख़राब फैसले लिए:
पहला – 2016 के आखिर में इंग्लैंड के बांग्लादेश दौरे के दौरान चटगाँव में हुए पहले टेस्ट मुकाबला (अक्टूबर 20–24, 2016) के आखिरी दिन के दौरान धर्मसेना ने मोइन अली को 3 बार (लगातार) आउट करार दिया तथा सभी फैसले गलत निकले (क्योंकि अली ने तीनों फैसलों पर रिव्यु लिए)। अंपायरिंग में ऐसी ज़बरदस्त गलती पहले कभी नही देखी गई थी।
दूसरा – फरवरी 14, 2015 को इंग्लैंड बनाम ऑस्ट्रेलिया के 2015 वर्ल्डकप के ग्रुप मैच के दौरान अलीम दार तथा धर्मसेना ने अंपायरिंग त्रुटियां कीं, जिसके कारण इंग्लैंड के बल्लेबाज जेम्स टेलर महज 2 रन की कमी से अपने पहले शतक से चूक गए।
जब इंग्लैंड का स्कोर 231/9 था, दार ने टेलर को (जोश हेज़लवुड के ओवर में) एलबीडब्ल्यू आउट दिया तथा ग्लेन मैक्सवेल ने जेम्स एंडरसन (जो दूसरे छोर पर थे) को उसी गेंद पर रन-आउट किया। डार का निर्णय डीआरएस द्वारा गलत साबित हुआ, जिसका अर्थ था कि गेंद को “डेड” घोषित किया जाना था, परन्तु फिर भी धर्मसेना ने रन-आउट के लिए जाँच की मांग की तथा एंडरसन को आउट दे दिया।
खराब अंपायरिंग की वजह से क्रिकेट को इतना नुकसान हुआ है कि विश्व कप के नवीनतम विजेता को एक महत्वपूर्ण कारण के लिए न्यूजीलैंड होना चाहिए था, लेकिन इंग्लैंड हुआ।
वो धर्मसेना ही थे जिन्होंने इंग्लैंड को ओवरथ्रो के लिए पांच की जगह छह रन दे दिए थे, जबकि खेल के कानून 19.8 के मुताबिक पांच ही रन दिए जाने चाहिए थे। आईसीसी के नियम “टाई होने पर ज़्यादा बाउंड्री मारने वाली टीम विजेता होगी” तथा धर्मसेना की अविस्मरणीय गलती के कारण इंग्लैंड को विजेता घोषित कर दिया गया |
लेकिन, अंदाजा लगाइए कि धर्मसेना ने स्वयं अपनी गलती के बारे ये कहा कि “मैं मानता हूं कि जब मैंने टीवी रिप्ले देखा तो एक निर्णायक त्रुटि नज़र आई थी। परंतु मैंने जो निर्णय लिया है, उस पर मुझे कभी पछतावा नहीं होगा। इसके अलावा, आईसीसी ने उस वक्त मेरे द्वारा लिए गए निर्णय की प्रशंसा की थी।
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TezzBuzz Staff

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